जीवन का सबसे सुंदर रंग प्रेम हे ये ऐसा रंग हे जिसमें हर कोई रंगना चाहता हे जीना चाहता हे ! जिस घर में प्रेम नहीं हे ,श्रधा नहीं हे ,विश्वास नहीं हे तो फिर वह घर खुशियां नहीं देता ! विश्वास ,प्रेम के धागे को बांधे हुए हे ! यदि विश्वास टूट गया तो प्रेम के धागे भी टूट जाते हें !
देने वाले मालिक ने आपको बहुत कुछ दिया लेकिन सब कुछ नहीं दिया ,कुछ न कुछ कमी रखी ! अगर कमि पर ध्यान देते रहोगे तो रोते रहोगे और अगर जो दिया हे उस पर ध्यान करोगे तो खुशी आयगी !
गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश
Sunday, November 15, 2009
Saturday, November 14, 2009
गुरु ज्ञान वाटिका के पुष्प
"पूरा ससार द्वन्द्वमय है। हार-जीत, मान-अपमान, सुख-दुख, गर्मी-सर्दी, उन्नति-अवन्न्ति, ये सब द्वंद है। इसी से ससार बना हुआ है। दोनो तरह के रूपों के बीच जीवन बहता
रहता है। इन दोनों के बीच जब सन्तुलन बनने लगता है तो अन्दर शांति आती है।"
परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज
"The whole world consists of two sides of every coin and dualities. Defeat-Victory, Pleasure-Pain, Hot-Cold, Progress-Regress, these are all opposites and the world is full of them. Our life keeps moving in between these dual states. But when we are able to balance between these dual states, then only we are able to achieve inner peace."
His Holiness Sudhanshuji Maharaj
Humble Devotee
Praveen Verma
| प्रतिक्रियाएँ: |
Wednesday, November 11, 2009
Monday, November 9, 2009
द्वंद
- "पूरा संसार द्वन्द्वमय है। हार-जीत, मान-अपमान, सुख-दुख, गर्मी-सर्दी, उन्नति-अवन्न्ति, ये सब द्वंद है। इसी से ससार बना हुआ है। दोनो तरह के रूपों के बीच जीवन बहता
रहता है। इन दोनों के बीच जब सन्तुलन बनने लगता है तो अन्दर शांति आती है।" - गुरुवर सुधान्शुजी महाराज के प्रवचनांश
Sunday, November 8, 2009
मुठी बंद रखो
- किसी भविष्य वक्ता के सामने हात मत फैलाओ और घर की बात मुठी में रख कर रखना किसी को बताना नहीं !
- गुरुवर सुधान्शुजी महाराज के प्रवचनांश
Thursday, November 5, 2009
माया
- भगवान से कहो कि विनम्रता दो ! झुकने की आदत दो ! तेरे चरण तक झुक सकें इतनी नम्रता दो , दूर करदेना छल कपट का स्वभाव ! सारा विश्व मेरा मित्र बन जाए ! हमारी कठोरता निर्दयता दूर होजाए , हृदय प्रेम से भर जाए !माया के चक्कर में मत पडना - पार नहें होपाओगे
माया भूखा जगत सब
भक्ति भूका संत
उनके हाहाकार हे
इनके यहां बसंत
माया ठगनी सब को ठगे
उतरन दे पार - गुरुवर सुधान्शुजी महाराज के प्रवचनांश
तनाव
- अगर आप तनाव से बचना चाहते हें तो एकांत में ,शांत हो कर हवादार जगह में बैठ कर लंबे लंबे साँस लीजिये और आराम से छोड़ो ,मुस्कराने की कोशिश करो ,माथा ढीला छोड़ो ! भगवान् पर भरोसा रखो ! मन की आदत हे विचारों में खो जाना तो आपको मन को अपने नियंत्रण में रखो और गहरे लंबे साँस लेते ! देखिय आपका तनाव थोड़ी देर में समाप्त हो जाएगा
- गुरुवर सुधान्शुजी महाराज के प्रवचनांश
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