
- आसक्ति और मोह का परित्याग ही भक्ति का द्वार है ! जब तक व्यक्ति मोह का परित्याग नहीं करता तब तक भक्ति का पाठ नहीं सीखता !
- परमपूज्य सुधांशुजी महाराज
- सग्रह कर्ता श्रीमती राज
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